नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास को मिलने वाली है नई उड़ान
Development of Western Uttar Pradesh is about to get a new boost
लखनऊ। Development of Western Uttar Pradesh is about to get a new boost, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र समेत पश्चिम उत्तर प्रदेश के सपनों को पंख देने वाले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे से विमान जल्द उड़ान भरेंगे। एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एयरोड्रोम लाइसेंस प्रस्तुत किया।
अब एयरपोर्ट के उद्घाटन और उड़ानों की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। जेवर में विकसित किया जा रहा यह एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ेगा।
यहां दस एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था होगी। रनवे पर प्रति घंटा लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट पर स्विस तकनीक और भारतीय आतिथ्य भी दिखेगा।
एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री से मिलकर परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी दी। एयरपोर्ट का एयरोड्रोम सिक्योरिटी प्रोग्राम ब्यूरो आफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है।
प्रतिवर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी क्षमता
मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन उद्घाटन और वाणिज्यिक संचालन की तिथि तय करेगा। एयरपोर्ट के पहले चरण में एक रनवे और एक यात्री टर्मिनल भवन बनाया गया है, जिसकी क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी।
दूसरे चरण में क्षमता तीन करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी। तीसरे और चौथे चरण में विस्तार के बाद कुल क्षमता सात करोड़ यात्रियों तक पहुंच जाएगी।
पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल लगभग 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक इन काउंटर, नौ सुरक्षा जांच लेन और नौ इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। आधुनिक कार्गो और लाजिस्टिक्स हब भी तैयार होगा। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे 15 लाख टन तक बढ़ाया जाएगा।
यात्रियों के लिए डिजियात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्राप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रहीं हैं।
एयरपोर्ट के लिए नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य है। परिसर में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी होंगी। एयरपोर्ट शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।